कृषि अधिनियम-2020 और किसान विरोध (Myth vs Reality) पार्ट - 1:

 नमस्कार दोस्तों, आजकल आप सब जगह: न्यूज़ पेपर, न्यूज़ चैनल, सोशल मीडिया पर नए कृषि अधिनियमों और किसानों का आंदोलन देख/सुन रहे हैं। आज के इस ब्लॉग में इन्हीं कृषि अधिनियमों के बारे में बताऊंगा जो हाल ही में संसद से पारित किये गये हैं। क्या हैं ये तीन कृषि अधिनियम 2020 और किसानों को किस बात का डर हैं जिसकी वजह से किसान इनका इतना विरोध कर रहे हैं ?

farm-bill-2020

September-2020 में भारत की संसद से तीन कृषि विधेयकों को पारित किया गया। राज्य सभा में तो बहुत हंगामा भी हुआ और इसी हंगामे के चलते ध्वनि मत से इन विधेयकों को पारित किया गया।

1. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम-2020
2. मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर करार और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) अधिनियम-2020
3. आवश्यक वस्तु (संसोधन) अधिनियम-2020
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मैं तीनों अधिनियमों के कुछ मुख्य-मुख्य बिंदुओं पर बात करूंगा।
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पहला अधिनियम:
1. किसान देश में कही पर भी जाकर अपनी फसल बेच सकते हैं, कोई इंटर स्टेट बैरियर नहीं होगा। उदाहरण के लिए यदि UP के किसान को हरियाणा/पंजाब की मंडी में बेहतर दाम मिले तो वह हरियाणा/पंजाब में जाकर अपनी फसल बेच सकता हैं। किन्तु किसानों का कहना हैं: किसान अपनी फसल देश में कही भी जाकर बेच सकते हैं। किन्तु उसमें ट्रांसपोर्ट का ख़र्चा होगा, समय लगेगा और यदि फसल onspot ना बिके तो फिर रख रखाव का ख़र्चा। इसलिए किसान अपनी फसल को कही दूर ना ले जाकर लोकल में ही बेच देते हैं।

2. नई प्राइवेट मंडिया खोली जा सकती हैं। जिससे किसानों को फसल बेचने के लिए ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे, बाजार में कंपीटिशन होगा तो फसल के अच्छे दाम मिलेंगे। वर्तमान में किसान Arhtiyas(middlemen between किसान और APMC) को APMC मंडी में ही अपनी फसल बेचते हैं। जिसके लिए Arhtiyas 2.5% का कमीशन लेते हैं। किसान अभी किसी को सीधे अपनी फसल नहीं बेच सकता हैं। नए बिल के अनुसार, APMC मंडियों के अलावा प्राइवेट मंडियां भी होगी जिससे बाजार में कंपीटिशन बढेगा तो किसान को फसल के अच्छे दाम मिलेंगे। वही दूसरी ओर, किसान को ये डर हैं कि नई प्राइवेट मंडियां खुलने से APMC की मंडियां बंद हो जाएगी और भविष्य में APMC की मंडियों का ऑप्शन ना होने पर किसानों को अपनी फसल प्राइवेट मंडी में MSP से कम दाम पर ही बेचनी पड़ेगी। इसलिए किसानों की माँग हैं कि सरकार MSP को ना हटाये और यह प्राइवेट मंडियों पर भी लागू होनी चाहिये। हालाकि प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि सरकार MSP नहीं हटाएगी। किन्तु MSP का नियम प्राइवेट मंडियों पर यह लागू होगा या नहीं, इसकी कोई surity नहीं हैं। ऐसे में प्राइवेट मंडिया अपनी मर्जी से फसल खरीद सकते हैं।

3. सरकार कह रही हैं कि किसानों के लिए ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा होगी। जैसे बाकी सब अपना सामान ऑनलाइन बेच रहे हैं तो किसान अपनी फसल ऑनलाइन क्यों नहीं बेच सकता। इसलिए सरकार किसानों को ऑनलाइन ट्रेडिंग का ऑप्शन दे रही हैं।

4. फसल खरीदने के लिए प्राइवेट लाइसेंस दिए जाएंगे। उदाहरण के लिए मुझे 50 कुंतल अनाज की आवश्यकता हैं, तो मैं सीधे किसान से बात कर सकता हूँ और किसान से अनाज ले सकता हूँ। उसके लिए मुझे किसी मंडी या Arhtiyas के पास जाने की आवश्यकता नहीं हैं। मैं सीधे किसान से ले सकता हूँ।

जानकारी के लिए बता दूं:
1. बिहार देश का पहला राज्य हैं जहाँ पर APMC act 2006 में ही खत्म किया जा चुका हैं। वहाँ कभी कोई आन्दोलन नहीं हुआ।
2. महाराष्ट्र में 2006 से ही प्राइवेट मंडिया और प्राइवेट लाइसेंस होल्डर हैं और वहां APMC मंडी सुचारू ढंग से चल रही हैं और लगभग 75% फसलें अभी भी APMC मंडी में ही खरीदी/बेची जाती हैं।

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धन्यवाद



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Er. Kamal Chauhan

Founder of World Current Affairs. Inspired to make things looks better.

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